Avadh Sanskriti, Bharat

Avadh Sanskarti Utkarsh Samti, Bharat

संस्था का परिचय : हमारे बारे में :

अवध संस्कृति, पहचान हमसे है

 स्वामी चिन्मयानद जी की कलम से

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अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति भारत एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था है, जो अवध क्षेत्र की प्राचीन, ऐतिहासिक, पौराणिक एवं लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन तथा व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर सक्रिय है। समिति का मूल उद्देश्य भारतीय सभ्यता की आत्माकृसंस्कृति, संस्कार, परंपरा और राष्ट्रबोध को जन-जन तक पहुँचाना है। संस्था द्वारा अवध की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पौराणिक स्थलों, तीर्थों, ऋषि-मुनियों की तपोभूमियों, लोक कलाओं, भाषा, साहित्य, नाट्य, संगीत एवं परंपराओं पर गहन शोध कार्य किया जाता है। साथ ही संगोष्ठियों, जनजागरूकता अभियानों तथा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को उसकी गौरवशाली विरासत से जोड़ा जाता है। ऐतिहासिक तथ्यों के संरक्षण तथा विकृत एवं भ्रामक इतिहास के सुधार हेतु समिति वैचारिक एवं बौद्धिक स्तर पर सतत प्रयासरत है। अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति भारत सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। समिति का दृढ़ विश्वास है कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही राष्ट्र का सर्वांगीण एवं सतत विकास संभव है। इसी भाव के साथ संस्था युवाओं, बुद्धिजीवियों, कलाकारों एवं समाजसेवियों को एक मंच पर जोड़ते हुए सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में कार्य कर रही है। इसके अतिरिक्त संस्था पर्यावरण संरक्षण केप्रति सजग प्रहरी के रूप में व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित कर रही है। साथ ही नारी शक्ति के सशक्तिकरण तथा उन्हें विभिन्न स्तरों पर स्वावलंबी बनाने हेतु निरंतर, सुनियोजित एवं समर्पित प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी समिति द्वारा महत्त्वपूर्ण पहल की जा रही है। जनपद गोण्डा में गोस्वामी तुलसीदास डिजिटल लाइब्रेरी, सूकरखेत (छतौनी) तथा गोस्वामी तुलसीदास डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। अवध की अस्मिता, भारतीय संस्कृति, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, नारी सशक्तिकरण और राष्ट्रहित के लिए समर्पित यह संस्था समाज में निरंतर सकारात्मक, रचनात्मक एवं प्रेरणादायी भूमिका का निर्वहन कर रही है।

-स्वामी चिन्मयानंन्द, जी महाराज 
मुख्य संरक्षक, अवध संस्कृति , भारत


अध्यक्ष के बारे में

श्री महेश कुमार सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के गोण्डा जनपद के ग्राम छतौनी में 13 अगस्त 1981 को हुआ। उनके पिता स्वर्गीय श्री जमादार सिंह एवं माता श्रीमती कमला देवी सिंह हैं। श्री महेश कुमार सिंह वर्तमान में अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे संग्रह टाइम्स पब्लिकेशंस के प्रधान संपादक एवं प्रकाशक भी हैं।

सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका सक्रिय और सराहनीय योगदान रहा है। अवध क्षेत्र की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन हेतु वे निरंतर प्रयासरत हैं। उनके नेतृत्व में अनेक सामाजिक एवं सांस्कृतिक अभियानों को दिशा मिली है। समाजहित, राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक चेतना के लिए किए गए उनके कार्यों को देखते हुए उन्हें विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

इसके साथ ही श्री महेश कुमार सिंह पर्यावरण संरक्षण के सजग प्रहरी के रूप में भी जाने जाते हैं। प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जनजागरूकता के लिए वे सामाजिक स्तर पर निरंतर प्रयास करते रहे हैं।

सादगी, स्पष्ट विचारधारा और कर्मठता उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान है। सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रहित के प्रति उनका समर्पण उन्हें एक जिम्मेदार एवं प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है।


व्यवसायिक परिचय
श्री ठाकुर सूर्यकांत सिंह जी उत्तर प्रदेश के जनपद गोण्डा में जन्मे एक सफल, दूरदर्शी एवं अनुभवी उद्यमी हैं। वे रियल एस्टेट के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा देश के कई प्रमुख शहरों में उनका कारोबार विस्तारित है। व्यावसायिक जगत में वे अपने सुदृढ़ निर्णय, पारदर्शिता और विश्वसनीय कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
संगठनात्मक एवं राष्ट्रीय भूमिका
अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति भारत के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में श्री ठाकुर सूर्यकांत सिंह जी संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त, सुव्यवस्थित एवं गतिशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, समन्वय क्षमता एवं दूरदृष्टि के कारण संस्था की गतिविधियाँ विभिन्न प्रदेशों में प्रभावी रूप से संचालित हो रही हैं।
सांस्कृतिक दृष्टि एवं संकल्प
श्री सिंह जी भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूर्णतः समर्पित हैं। वे मानते हैं कि सांस्कृतिक चेतना ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। इसी भाव के साथ वे संगठन के माध्यम से जन-जागरूकता, शोध एवं सांस्कृतिक अभियानों को निरंतर गति प्रदान कर रहे हैं।


व्यवसाय से नेतृत्व तक
श्री वासुदेव मिश्र जी उत्तर प्रदेश के गोण्डा में जन्में एक दूरदर्शीए निर्णायक एवं मूल्यनिष्ठ नेतृत्वकर्ता हैंए जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कार्यशैली से संगठन एवं समाज दोनों में विश्वास की मजबूत नींव स्थापित की है। वे नेतृत्व को केवल पद नहींए बल्कि दायित्व और सेवा का माध्यम मानते हैं।
दिल्ली में बादाम के प्रतिष्ठित व्यापार से जुड़े श्री मिश्र जी ने व्यापारिक क्षेत्र में अनुशासनए पारदर्शिता और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ कार्य करते हुए सफलता प्राप्त की है। व्यापार के माध्यम से अर्जित अनुभवए प्रबंधन क्षमता और निर्णय.कौशल को उन्होंने सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व के रूप में रूपांतरित किया है।
सांस्कृतिक नेतृत्व एवं संगठनात्मक भूमिका
अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति भारत के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में श्री वासुदेव मिश्र जी अवध क्षेत्र की प्राचीनए ऐतिहासिकए पौराणिक एवं लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन हेतु संगठन को एक सशक्त दिशा प्रदान कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में समिति सांस्कृतिक चेतनाए जनजागरूकता एवं शोध आधारित गतिविधियों के माध्यम से समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है।
दृष्टिए मूल्य एवं संकल्प
श्री मिश्र जी का मानना है कि संस्कृतिए संस्कार और राष्ट्रबोध के बिना कोई भी समाज सशक्त नहीं बन सकता। उनका नेतृत्व भारतीय सांस्कृतिक मूल्योंए सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना पर आधारित है। वे भावी पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने हेतु निरंतर सक्रिय एवं प्रतिबद्ध हैं।